Popular Posts

Saturday, January 17, 2015

Short Shayries



मीठी यादों के साथ गिर रहा था,
पता नहीं क्यों
फिर भी मेरा वह आँसु खारा था


हज़ार चेहरों में उसकी झलक
मिली मुझको;
पर दिल की ज़िद्द थी, अगर
वो नहीं तो उस के
जैसा भी नहीं।
________________________________________


लाजिमी नहीं की आपको आँखों से ही देखुं।
आपको सोचना आपके दीदार से कम नहीं।।
________________________________________


काश इस गुमराह दिल को  ये मालूम होता
कि
मोहब्बत उस वक्त तक ही  दिलचस्प होती है जब तक  नहीं होती.....!!!!
________________________________________


अंधेरे मे, गम के अंधेरे मे दिल को ना बेकरार कर,
सुबह जरूर होगी सुबह का इन्तेज़ार कर" 
________________________________________

बचपन के खेल में छुप जाता था में दोस्तों से ..

आज खोजने पर भी वो दोस्त नजर नहीं आते !!

No comments:

Post a Comment